तलाक सभी जायज चीजो मे सब से गंदी और गलीज चीज है ….


दो अलग अलग खानदान, अलग अलग खयाल , अलग अलग घर और जगह के फर्द (लडका और लडकी ) एक खानदान, एक खयाल होकर एक घर मे जिंदगी गुजारे इसत्रका नाम शादी , निकाह या विवाह है ..। 
अब जाहिर सी बात यह है के सब के खयाल हमेशा ही जुड नही सकते , कभी कभी wrong choice हो जाता है … इस हाल मे झगडो मे जिंदगीया बरबाद ना करते हुए अलग होने के तरीके को “तलाक” यानी घटस्फोट या डिवोर्स कहते है ।
इसका तरीका इस्लाम ने यह बताया है के एक तलाक देने के बाद पती पत्नी एक महिना अलग हो जाये , और दुर रहकर एक दुसरे को समझने की कोशिश करे , अगर फिर भी समझोता ना हो तो दुसरा तलाक दे और फिर एक महिना दूर रहे , अगर समझोता हो गया तो दोनो फिर साथ मे रहे , मगर इस दौरान भी समझोता ना हुवा तो तिसरा तलाक देकर हमेशा के लिए अलग हो जाए । इस दौरान बिवी का खर्च शोहर दे और बादमे मेहेर और बच्चे हो तो उनका भी हक शोहर को देना पडता है ।
मगर कुछ लोगोने इस को खेल बनाया और एक साथ तीनो तलाक देकर बिवीयो पर जुल्म करने लगे , इसलीये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा .

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इस दरमीयां हुकुमत और हुकमरान जिस खयाली खेमे से ताअल्लूक रखते है उन्होने ऐसा माहोल बनाया के लगने लगा हर मुस्लिम औरत को तलाक दिया जाता है , जब के तलाक की औसत 2-3% से भी कम है , मगर इस को मुद्दा बनाने से माहौल 100% गर्म हो सकता है, और यह कुछ लोगोके निकम्मेपन को छुपाने के लिए जरूरी है । 
मगर सुप्रीम कोर्ट ने बहोत ही अच्छा फैसला देते हुए तलाक पर कोई भी पाबंदी न लगाते हुए सिर्फ एकसाथ तीनो तलाक देने को गैर आईनी करार देते हुए सरकारको 6 महिनो मे कानून बनाने को कहा है और लाल कीले से जो गुब्बारा (फुगा) छोडा गया था उस की हवा निकाल दी है ।
मै सुप्रीम कोर्ट (मर्कजी अदालत) के फैसले का इस्तकबाल करता हूँ और कौम के लिडरो से यह गुजारीश करता हूँ के बगैर मालुमात के बेतुके बयान बाजी से दूर रहे , और देश मे अमन शांती को बरकरार रखे ।
जयहिंद जय भारत !!

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लेखक ;एड.समिर  शेख 

 

 

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