आप (सल्ल°) की तशरीफ़ आवरी से पहले की जहालत और जलालत का आलम

सजग नागरिक टाइम्स :आप (सल्ल°) की तशरीफ़ आवरी से पहले की जहालत और जलालत का आलम ये था
दुनिया तारीकी के गढे में फंस कर गर्क हो गयी थी
किसी के खेत में एक ऊंटनी चली गयी
जानवर हे चला गया खेत में
उसके थन काट दिए
इस पर जो जंग हुई हुज़ूर करीम (सल्ल)
की तशरीफ़ आवरी से पहले अरब के खानदान में 63 बरस जंग लगी रही
वो अरब जिसकी तहज़ीब ओ तमद्दुम इस कदर बिगड़ गयी थी
बैतुल्लाह के दरवाज़े पे खड़े हो कर लोग
कहा करते थे ओ में सब से बड़ा हु इस लिए के मेरे बाप का 1 हज़ार औरतो से याराना था
इतनी बिगड़ी हुई तहज़ीब इंसानियत तबाह हो गई थी
ईमान ओ यकीन का नामो निशान ना था
अमल ना था, अख़लाक़ ना था, किरदार ना था कोई इंसान को इंसान जानने वाला ना था तमाम कायनात खुदा को फरामोश कर चुकी थी

इस कदर जहालत ने डेरे डाले के लोग अपनी बच्चियो को ज़िंदा दफना दिया करते थे
कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया
में पूछूँगा किस जुर्म में तुमने उन बच्चियो
को क़त्ल किया बताओ क्या खता की उन्होंने क्या जुर्म किया था
मगर उस आने वाले ने आ कर
ऐसे हालात पैदा किये
इसी को यु कहा हे
खुद ना थे जो राह पर , औरो के हादी बन गए
क्या नज़र थी जिसने मुर्दो को
मसीहा कर दिया
दस्तो गिरेबांन होने वाले लोग
एक दूसरे को कत्ल कर देने वाले लोग
दुश्मनीओ के तूफ़ान में रहने वाले लोग
एक दूसरे की इज़्ज़त ओ आबरू के निगेहबान बन गए
रेहमत ऐ आलम (सल्ल) ने ऐसा पैगाम दिया उनको आ कर
दुनिया सारी की सारी चमक उठी धमक उठी एक निजाम में आ गयी
बदनसीब हे वो लोग जिन के घरो से जहालत आज तक ना गयी
कितने बदबख्त हे वो लोग जिन के घरो से रस्मे आज तक ना निकली
वो ही रस्म वो ही रिवाज़ बल्कि उसमे इज़ाफ़ा हो रहा हे

लेखिका ;अंजली शर्मा

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